PADMASHREE AWARD



चमनलाल सप्रू


चमनलाल सप्रू का जन्म जनवरी, 1935 ई. में हुआ था। प्रोफ़ेसर चमनलाल सप्रू कश्मीर के सांस्कृतिक इतिहास के अधिकारी विद्वान, एक लेखक-पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में अग्रणी हैं। हिंदी को जम्मू-कश्मीर के कॉलेजों में ऐच्छिक विषय के रूप में पढ़ाने के लिए किया गया चमनलाल सप्रू जी का आंदोलन सुप्रसिद्ध है।

संपादन कार्य

सप्रू जी ने राज्य एवं आकाशवाणी के श्रीनगर केंद्र में हिंदी को उसका उचित स्थान दिलाने में सफलता प्राप्त की। प्रोफ़ेसर सप्रू को स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात कश्मीर घाटी से प्रकाशित प्रथम हिंदी पत्रिका 'कश्य‍प' का संपादक होने का भी श्रेय प्राप्त है। कश्मीरी भाषी हिंदी लेखक आदर से सप्रू जी को 'कश्मीर का महावीर प्रसाद द्विवेदी' कहते हैं। सप्रू जी कश्मी‍र में हिंदी के प्रचार-प्रसार को उसके भारतीयकरण का सशक्त रचनात्मक माध्यम मानते हैं।

पुरस्कार व सम्मान

कश्मीरी में दो, उर्दू में एक, अँग्रेज़ी में एक तथा हिंदी में पंद्रह पुस्तकों के रचयिता प्रोफ़ेसर सप्रू को अपनी दो महत्वपूर्ण पुस्तकों 'केसर और कमल' तथा 'संतूर के स्वर' पर केंद्रीय तथा राज्य सरकार की ओर से पुरस्का‍र भी प्राप्त हो चुके हैं। वे उत्तर प्रदेश सरकार के 'सौहार्द्र सम्मान', मैसूर हिंदी प्रचार परिषद के 'स्वर्ण जयंती पुरस्कार' तथा हिंदी अकादमी, दिल्ली के 'साहित्यकार सम्मान' से भी सम्मानित किए जा चुके हैं। हिंदी की अप्रतिम सेवा के लिए प्रोफ़ेसर चमनलाल सप्रू को 'केंद्रीय हिंदी संस्थान' ने 'गंगाशरण सिंह पुरस्कार' से सम्मानित किया है।


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